Ganesh chatuthi – क्यों भगवान गणेश के पास एक छोटा-सा चूहा ?

क्यों भगवान गणेश के पास एक छोटा-सा चूहा ?

भगवान गणेश की सवारी एक चूहा ?

गणपति देव जिसको विध्नहर्ता कहते है क्योंकी वो सारे हमारे दुख दूर करते है। हर घर के मंदिर सिर्फ गणेश जी के ही रंग में रंग गए हैं. गणपति के भजन और गानों में भक्त नाच गा रहे हैं. गणपति (Ganesh Chaturthi) के तरह-तरह के रूप देखने को मिल रहे हैं लेकिन आज हम आपको गणेश की सवारी एक छोटा-सा चूहा कैसे बना वो आज बताने वाले है

जानिये एक कथा गणपति देव की :

जानिये एक कथा के बारे में, एक आधा भगवान और आधा राक्षक प्रवृत्ति वाला नर था क्रोंच. जब भगवान इंद्र ने अपनी सभा में सभी मुनियों को बुलाया, इस सभा में क्रोंच भी शामिल हुआ.

यहां गलती से क्रोंच का पैर एक मुनि के पैरों पर रख गया. इस बात से गुस्से होकर उस मुनि ऋषि ने क्रोंच को चूहे बनने का श्राप दिया. क्रोंच ने मुनि से क्षमा मांगी, लेकिन वह अपना श्राप वापस नहीं ले पाए, लेकिन उसने एक वरदान दिया कि आने वाले समय में वो शिव के पुत्र गणेश की सवारी बनेंगे.

फिर क्रोंच कोई छोटा-मोटा नहीं बल्कि एक विशाल चूहा था. जो मिनटों में पहाड़ों को कुतर डालता था. इसका आतंक इतना था कि वन में रहने वाले ऋषि-मुनियों को भी वह बहुत परेशान किया करता था.

इसी तरह एक दिन उसने महर्षि पराशर की कुटिया भी तहस-नहस कर डाली. महर्षि पराशर भगवान गणेश का ध्यान कर रहे थे. कुटिया के बाहर मौजूद सभी ऋषियों ने उसे भगाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन सफल ना हो पाए.

इसका समस्या के समाधान के लिए वो भगवान गणेश के पास गए और उन्हें सब कुछ बताया. गणेश जी ने चूहे को पकड़ने के लिए एक फंदा फेंका. इस पाश ने चूहे का पाताल लोक तक पीछा किया और पकड़ कर गणेश जी के सामने ले आया.

Ganesh chatuthi - क्यों भगवान गणेश के पास एक छोटा-सा चूहा ?

Ganesh chatuthi – क्यों भगवान गणेश के पास एक छोटा-सा चूहा ?

बताया, गणेश जी ने चूहे से इस तबाही की वजह जाननी चाही लेकिन क्रोधित से भरे उस चूहे ने कोई जवाब ना दिया. इसके बाद गणेश जी ने आगे चूहे से बोला कि अब तुम मेरे आश्रय में हो इसलिए जो चाहो मुझ से मांग लो, लेकिन महर्षि पराशर को परेशान ना करो.

इस पर घमंडी चूहे ने गणेश जी से कहा ‘मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए. हां, अगर आप चाहें तो मुझसे कुछ मांग सकते हैं.” इस घमंड को देख गणेश जी ने चूहे से कहा कि वो उनकी सवारी बनें. चूहे ने उनकी बात मानी और सवारी बनने को राज़ी हो गया.

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जैसे ही गणेश जी उस चूहे के ऊपर बैठे वो तभी से उनकी भारी भरकर देह से दबने लगा. चूहे ने बहुत कोशिश की लेकिन गणेश जी को लेकर एक कदम आगे ना बढ़ा सका.

गणेश से मिलती है सीख़ :

आपके वजन से मैं दबा जा रहा हूं.” इस माफी को स्वीकार कर गणेश जी ने अपना भर कम किया. इस तरह वह गणेश जी की सवारी बना. चूहे को मूषक भी कहा जाता है. चूहे का घमंड चूर-चूर हो गया और उसने गणेश जी से बोला,” गणपति बप्पा! मुझे माफ कर दें.

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